Tapkeswari Maataji Mandir, टपकेश्वरी माताजी

Tapkeshwari Mataji Mandir, Nr. Bharapar - BHUJ

Tapkeshwari Mataji Mandir, Nr. Bharapar - BHUJ

भुज से दक्षिण की और ५ माइल दूर भारापर से पास टपकेश्वरी माताजी का मंदिर एक सुन्दर जगह हैं जो कहा जाता है कि ४५० वर्ष पहले यहां कच्छ के तत्कालीन महारावश्री विजयरायजी ने बनवाया था !

मंदिर मे मां टपकेश्वरीजी की प्रतिमा

मंदिर मे मां टपकेश्वरीजी की प्रतिमा

सुना गया है कि उस समय माताजी ने दर्शन दिये थे तब वहा उनकी प्रतिमा के रुप मे स्थापित हो गई थी जो मुर्त आज भी मंदीर के बाये बाजु पुर्व मे यथास्थित है, और मंदिर के अंदर पुजा के लीए दोहरी स्थापित की गयी हैं !

टपकेश्वरी आने पर एक हिमाचल या उत्तर भारत के गढवाल का सा, होने जैसा आनंद महसुस होता है तथा यह रमणीय स्थल है ऐसा भी कह सकते है !

छोटीसी गुफाऐं

छोटीसी गुफाऐं

टपकेश्वरी मंदिर के पास ही सेकडो वर्षो पुराने कमरे दर्शनार्थीयो के रहने के लीये उस समय के कला को दर्शाते है !
मंदिर उत्तर भाग को छोड तीन तरफ से ढक्के पहाडो के बीच मे बना हुआ है, पश्चिम तरफ मे ऊपर की और छोटीसी गुफाऐं है साथ ऊपर के लीये चडाव का रास्ता भी वही से जाता है !

Kachchh Museum

Kachchh Museum, originally uploaded by Lalwani Rajesh.

भुज का कच्छ म्युजीयम गुजरात का पुराना म्युजीयम है, १८७७ मे महाराव खेंगारजी-३ (तीसरे), द्वारा स्थापीत कीया गया था. महाराव खेंगारजी के समय यह सीर्फ निजी महेमानो के दर्शन के लीए ही था, भारत की आझादि के बाद सार्वजनिक दर्शन को खुल्ला कर दीया गया! म्युजीयम भुज के बीच सुन्दर हमीरसर तालाब के पास बना हैं! म्युजीयम मे १८वीं सदी और उससे भी पुरानी कलाक्रति और साथ २०वीं सदी तक की वस्तुओ को देखा जा सकता है, साथ कच्छ की जाति व समाज को दर्शाती पुतलाक्रुति भी देखने मिलती है!

Alfred high school, bhuj

alfredhs

१८७० मे स्थापित अल्फ्रेड हाई स्कुल, भुज का पुराना विध्यालय है!

Navratri


नवरात्री उत्सव के समय गुजरात व कच्छ के बाजार मे जगह जगह पर कई तरह के गरबे (माटी की मटकी) का रंग काम शुरु हो जाता है, सुन्दर कलात्मक कारीगरी के साथ आस्था के ईस पवित्र त्योहार को बडे धुमधाम से मनाया जाता है!

EID E MILLADUNABI

EID E MILLADUNABI, originally uploaded by Lalwani Rajesh.

ईद-ए-मिल्लादुनबी के मोके पर मुस्लीम समाज द्वारा दोपहर नमाज बाद गांधीधाम मे जुलुस निकाला गया और दुआ सलाम की गयी, बडे. पैमाने मे जुटी भीड. की ली गयी तसवीर ईद उर्स का माहोल बया करती है!