Tapkeswari Maataji Mandir, टपकेश्वरी माताजी

Tapkeshwari Mataji Mandir, Nr. Bharapar - BHUJ

Tapkeshwari Mataji Mandir, Nr. Bharapar - BHUJ

भुज से दक्षिण की और ५ माइल दूर भारापर से पास टपकेश्वरी माताजी का मंदिर एक सुन्दर जगह हैं जो कहा जाता है कि ४५० वर्ष पहले यहां कच्छ के तत्कालीन महारावश्री विजयरायजी ने बनवाया था !

मंदिर मे मां टपकेश्वरीजी की प्रतिमा

मंदिर मे मां टपकेश्वरीजी की प्रतिमा

सुना गया है कि उस समय माताजी ने दर्शन दिये थे तब वहा उनकी प्रतिमा के रुप मे स्थापित हो गई थी जो मुर्त आज भी मंदीर के बाये बाजु पुर्व मे यथास्थित है, और मंदिर के अंदर पुजा के लीए दोहरी स्थापित की गयी हैं !

टपकेश्वरी आने पर एक हिमाचल या उत्तर भारत के गढवाल का सा, होने जैसा आनंद महसुस होता है तथा यह रमणीय स्थल है ऐसा भी कह सकते है !

छोटीसी गुफाऐं

छोटीसी गुफाऐं

टपकेश्वरी मंदिर के पास ही सेकडो वर्षो पुराने कमरे दर्शनार्थीयो के रहने के लीये उस समय के कला को दर्शाते है !
मंदिर उत्तर भाग को छोड तीन तरफ से ढक्के पहाडो के बीच मे बना हुआ है, पश्चिम तरफ मे ऊपर की और छोटीसी गुफाऐं है साथ ऊपर के लीये चडाव का रास्ता भी वही से जाता है !

Narayan Sarover

Narayan Sarover, originally uploaded by Lalwani Rajesh.

Temple at Narayan Sarover

कच्छ के वायव्य कोन में पश्चिम सीमा मे आया हुआ यह “नारायण सरोवर” तिर्थ एक प्राचिन स्थल है, यहां भारत के मसहुर सरोवरो मे से एक महान सरोवर था जो पुराणो मे नारायण सरोवर के नाम से जाना जाता था, श्री मद भागवत के अनुसार दक्ष प्रजापति के पुत्रो ने यहां तपस्या की थी, नारायण सरोवर गांव के नैत्रत्व मे भगवान आदि नारायण का मंदिर है जहां प्राचिन नारायण सरोवर के अवशेष डटे है एसा कहा जाता है!

Kachchh Museum

Kachchh Museum, originally uploaded by Lalwani Rajesh.

भुज का कच्छ म्युजीयम गुजरात का पुराना म्युजीयम है, १८७७ मे महाराव खेंगारजी-३ (तीसरे), द्वारा स्थापीत कीया गया था. महाराव खेंगारजी के समय यह सीर्फ निजी महेमानो के दर्शन के लीए ही था, भारत की आझादि के बाद सार्वजनिक दर्शन को खुल्ला कर दीया गया! म्युजीयम भुज के बीच सुन्दर हमीरसर तालाब के पास बना हैं! म्युजीयम मे १८वीं सदी और उससे भी पुरानी कलाक्रति और साथ २०वीं सदी तक की वस्तुओ को देखा जा सकता है, साथ कच्छ की जाति व समाज को दर्शाती पुतलाक्रुति भी देखने मिलती है!

Alfred high school, bhuj

alfredhs

१८७० मे स्थापित अल्फ्रेड हाई स्कुल, भुज का पुराना विध्यालय है!

EID E MILLADUNABI

EID E MILLADUNABI, originally uploaded by Lalwani Rajesh.

ईद-ए-मिल्लादुनबी के मोके पर मुस्लीम समाज द्वारा दोपहर नमाज बाद गांधीधाम मे जुलुस निकाला गया और दुआ सलाम की गयी, बडे. पैमाने मे जुटी भीड. की ली गयी तसवीर ईद उर्स का माहोल बया करती है!

Fort at Lakhpat, Village Lakhpat – Kachchh

Fort at Lakhpat, Village Lakhpat – Kachchh

Originally uploaded by Lalwani Rajesh

Although there was a Gurdwara here since the 1800s, in the later part of twentieth century, some Sikh families had settled near Lakhpat and other parts of Kutch, specially at Gandhidham. This was the port-city of Kandla port, which was built in the year 1952. In the wake of independence of India in 1947, lot of Sindhi’s families settled in Kutch from erstwhile Sind Province. Sindhi’s have been devotees of Guru Nanak Dev. They with the co-operation of the Sikh’s built a Gurudwara at Gandhidham and this Gurudwara management along with a Sindhi fellow settled at Lakhpat after independence. They have been looking after the Lakhpat shrine for the last 50 years.

It is believed that Guru Nanak Dev ji stayed at Lakhpat several times while travelling south and to Mecca and Medina (Saudi Arabia). The place served as a seat of the Udasi Sect. Several rare treasures are preserved here at Gurudwara Shri Lakhpat Sahib including the “charan Paduka” – Khadvas (wooden footwear) of Guru Nanak Dev ji’s.

At present various extensions are being added to the Gurdwara complex and this “sewa” of additional building of Yatri Niwas (visitor’s sleeping rooms), Langar hall (Dining hall), Diwan Hall (congregation hall) is being undertaken by Shri Baba Lakkha Singh ji – Baruch.