“कच्छ दर्शन”

“कच्छ दर्शन” ब्लाग कच्छ की जानकारी देने के लीये राष्ट्र भाषा मे निर्मीत कीया जा रहा है ताकी भारत के विभीन्न प्रान्तो के लोगों तथा विश्व भर मे बसे भारतीयो को कच्छ के लोगो, स्थल, समाज, इतिहास, एतिहासिक स्थल, ईत्यादि विषयो की अधिक से अधिक जानकारी विस्तरीत दे सके यही कच्छ दर्शन की कोशिश रहेगी!

ब्लोग का कार्य शुरु है, समयानुसार जानकारीयों को बढाया जाता रहेगा!

आपके सुजाव व विचारो का स्वागत है!

आपका,
राजेश लालवानी

Kachchh Darshan

“कच्छ” का नाम कछुए रूपी नक्षे के कारण “कच्छ” पडा! सभी तरफ से समुन्द्र से घीरा हुवा गुजरात का यह भेज वाला जिल्ला है!

२२’ उ. से २४’ उ. अक्षांश और ६८’ पु. से ७१’ पु. रेखांश के बीच है!
कच्छ की राजधानी “भुज है और दस (१०) तहसील है,
(०१) भुज, (०२) अंजार
(०३) भचाऊ (०४) रापर
(०५) नखत्राणा (०६) मुन्द्रा
(०७) मांडवी (०८) अबडासा (नलीया)
(०९) लखपत (दयापर) (१०) गांधीधाम

कच्छ का विस्तार :- अंदाजीत ४२,९०९ चो. कि.मी. है, जिसमें से २३,३१० चो. कि.मी. रणविस्तार है, गुजरात राज्य का २३.२७% (प्रतिशत) विस्तार भाग कच्छ का है जो कि विशाल जिला है!

वस्ती :- १९९१ के अनुसार यहां की वस्ती १२,४५,९६७ है, गुजरात के कुल वस्ती का, ३.०३% (प्रतिशत) लोग यहां बसते है!

हवामान :- ठंडी के रितु मे पारा शुन्य तक जा पहुचता है, गर्मी में ४५ डीग्री तक गरम रहता है, सामान्यत: वातावरण शुष्क और रात्री में खुशनुमा रहता है,

रण की और दरिया किनारे की जमीन क्षारयुक्त है, रण के पास होने के कारण रेतीली हवाओ का असर अधिक रहता है, मध्य कच्छ मे जमीन काली और नदीयों वाले विस्तार मे कांपवाली है, मध्य भाग छोटे मोटे पर्वतो वाला तथा सबसे बडा पर्वत “कालाडुंगर” है जिसकी ऊंचाई १५२५ फुट है!

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